चीटिंग हुई, पर बहुत बड़ी नहीं। वैसा धोखा नहीं है, जिसके बारे में रोज इधर-उधर सुनते रहते हैं। लेकिन, धोखा तो है। कुछ लोग भले इसे हंसी-मज़ाक़ में लें, लेकिन बहुतों के दिल पर लगती है बात। पूरी दुनिया में लोग माइक्रो चीटिंग का शिकार हो रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बारे में पता तक नहीं चल रहा।


माइक्रो चीटिंग, एक छोटा सा धोखा लेकिन…

माइक्रो चीटिंग, जैसा नाम से ही साफ है, इतने छोटे स्तर पर धोखा देना, जिसे पहचानना-पकड़ना आसान ना हो। आमतौर पर इसमें धोखा देने वाला इंसान अपने पार्टनर के अलावा किसी और के साथ फिजिकल रिलेशन तो नहीं बनाता, लेकिन वह अपने व्यवहार से जरूर धोखा दे रहा होता है। यही वजह है कि साइकोलॉजिस्ट इसे रिश्ते में इमोशनल चीटिंग मानते हैं।

रिलेशनशिप एक्सपर्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत कहती हैं, “माइक्रो चीटिंग में इंसान अपने पार्टनर से ईमानदार तो होता है, लेकिन उसके बाद भी वह इमोशनल चीटिंग करता है। मसलन किसी के साथ छुपकर फ्लर्ट करना, किसी को छुप-छुपकर मेसेज करना और फिर उन्हें डिलीट कर देना या छुप-छुपकर किसी से मिलना, इसको माइक्रो चीटिंग कहा जाता है। इसमें जरूरी नहीं कि कोई फिजिकल इंटीमेसी हो।”

साइकोलॉजिस्ट और रिलेशनशिप एक्सपर्ट डॉ. इशिता मुखर्जी कहती हैं, “आज की जनरेशन के सभी लोग तो नहीं, लेकिन ज्यादातर इस तरह की चीटिंग में किसी ना किसी तरह शामिल रहते हैं। कई लोग इसे गलत भी नहीं मानते। वह कहते हैं कि क्या हो गया अगर हमने ऐसा कर लिया तो। हम किसी से फिजिकल तो नहीं हुए।”


क्या है माइक्रो चीटिंग की वजह

इस धोखे की कोई एक वजह नहीं होती। इस तरह के कई केस देख चुकीं डॉ. चांदनी तुगनैत  बताती हैं कि कई लोगों की शादी जबरदस्ती हुई होती है, तो वे एक वक्त बाद ऐसा करने लगते हैं। कई लोग कहते हैं कि हम अपने पार्टनर से प्यार तो करते हैं, लेकिन रिश्ते में बोरियत की वजह से दूसरे के प्रति आकर्षित हो जाते हैं। कुछ लोग अपने रिश्ते से संतुष्ट नहीं होते, लेकिन इज्जत की वजह से किसी से कुछ कह नहीं पाते। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनमें सेल्फ एस्टीम कम होता है और उन्हें बाहर किसी से यह मान्यता चाहिए होती है कि अब भी उनमें वह बात, वह अट्रैक्शन बाकी है। इस वजह से वे माइक्रो चीटिंग करने लगते हैं।

“क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं?” इस तर्क के साथ कई लोग माइक्रो चीटिंग को बस फन या मजाक बताकर सही ठहराने की कोशिश करते हैं। लेकिन, यही माइक्रो चीटिंग धीरे-धीरे धोखाधड़ी में बदल सकती है। डॉ. इशिता मुखर्जी कहती हैं, “आज की पीढ़ी को हर चीज में ऑप्शन चाहिए और उसकी तलाश में भी वह माइक्रो चीटिंग की ओर झुकती है। लेकिन, धीरे-धीरे यही चीज़ बड़ी चीटिंग की ओर बढ़ती है, जिसमें फिजिकल इंटीमेसी भी होती है। इसी वजह से आजकल एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स के इतने केस सामने आ रहे हैं।”


इस तरह रोकें साथी के धोखे को

● पार्टनर के साथ बॉन्डिंग बनाएं। उनसे उनके दिन के बारे में पूछें, क्वॉलिटी टाइम बिताएं।

डॉ. चांदनी तुगनैत  कहती हैं, आमतौर पर हमें लगता है कि हम प्यार तो करते हैं, फिर जताने की क्या जरूरत? लेकिन, यह गलत है। अपने पार्टनर का टाइम लें, उन्हें अपना टाइम दें।

● कभी-कभी डेट्स पर जाएं। पार्टनर से पूछें कि उनके जीवन में क्या चल रहा है।

● माइक्रो चीटिंग की ओर लोग इसलिए मुड़ते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि अपने पार्टनर से अटेंशन नहीं मिल रही। अगर अटेंशन, प्यार मिल जाए, तो माइक्रो चीटिंग के चांस बहुत कम हो जाते हैं।

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