मारा स्वभाव हमारी पर्सनालिटी को दर्शाता है, लेकिन अगर क्या हो कि हम अपने स्वभाव में ही बदलाव करना शुरू कर दें। खासतौर पर माता-पिता बचपन से ही अपने बच्चों पर इतनी सख्ती कर देते हैं कि उनका जो प्राकृतिक स्वभाव होता है उसमें बदलाव आना शुरू हो जाता है। उन सख्तियों में से एक है गलती पर रोक। बच्चे गलती करते हैं तो माता-पिता उन्हें रोक देते हैं, लेकिन क्यों रोकना है, बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनका गलती करना भी बेहद जरूरी है। गलतियां ना केवल सीखने के लिए प्रेरित करती हैं बल्कि इससे उनका मनोबल भी बढ़ता है। साथ ही विफलता को भी स्वीकार करने के लिए तैयार होते हैं। ऐसे में आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि बच्चों को किस तरह की गलती करने से ना रोकें। जानते हैं, कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से… 

बच्चों को करने दें ये गलतियां?

अगर आपके बच्चे किसी चीज को चुनने में गलती कर रहे हैं तो उन्हें गलती करने दें। उदाहरण- स्कूल के लिए खुद कपड़े चुनाना। भले ही वह बेमेल हों, लेकिन उन्हें चुनने दीजिए। इससे न केवल बच्चों में निर्णय लेने की क्षमता विकसित होगी बल्कि वह चुनाव का परिणाम जानकार धीरे-धीरे सीखेंगे कि उनके लिए क्या अच्छा है। यदि बच्चे गड़बड़ी करते हैं तो यह भी एक प्यारी गलती हो सकती है। इसके लिए उन्हें टोके या रोके नहीं। अक्सर माता-पिता बच्चे से कोई गड़बड़ी होने पर उन्हें तुरंत डांट देते हैं, जिसके कारण बच्चा सहम जाता है। आप बच्चों को उनकी गलतियों पर ना डांटें। इससे उनकी क्रिएटिविटी बढ़ेगी और उनके अंदर एक्सप्लोरेशन की भावना भी बढ़ेगी।
बच्चों पर सफल होने का दबाव न डालें। अगर उन्हें हार भी मिल रही है तो इसके लिए उन्हें प्रेरित करें। उदाहरण यदि बच्चा साइकिल चलाते हुए गिर गया और उसका दोस्त आगे चला गया और वह जीत गया तो इसका मतलब यह नहीं कि आपके बच्चे ने गलती की है बल्कि यह है कि आपको उसे दोबारा खड़े होने के लिए प्रेरित करना है। ऐसे में असफलता के कारण न केवल उसके अंदर लचीलापन आएगा बल्कि दृढ़ता भी आएगी। आप उसे बताएं कि असफलता अंतिम नहीं है। सफलता से सीखा जा सकता है।
यदि आपका बच्चा कोई काम अधूरा छोड़ता है तो यह गलती भी उसे कई तरह की सीख दे सकती है। जैसे- किसी हॉबी क्लास को बीच में छोड़ देना या पेंटिंग को बीच में छोड़ देना, ऐसे में आप बच्चों को डांटने की बजाय उन्हें टाइम दें और उन्हें समझाएं कि किसी भी चीज को पूरा करना क्यों जरूरी है। आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह के अन्य आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।  

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