भावनात्मक उतार-चढ़ाव जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है। ये उतार-चढ़ाव तनाव के कारण, रिश्तों से जुड़े मुद्दों, स्वास्थ्य की समस्याओं और व्यक्तिगत चुनौतियों के कारण हो सकता है। इस समस्या से निपटने में कुछ तरीके आपके बेहद काम आ सकते हैं।
बैठे-बैठे आप रोने लगते हैं या फिर अचानक उदास हो जाते हैं, तो आपका ये व्यवहार आपकी परेशानी हो सकता है। इससे निपटने के लिए आप ये करें।
परिस्थिति को स्वीकारें
गेटवे ऑफ हीलिंग की संस्थापक और निदेशक व साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत कहती हैं कि स्वीकार करें कि भावनाएं यानी इमोशनल जीवन का एक हिस्सा है। ऐसे में इनसे लड़ने के बजाय उन्हें स्वीकार करना सीखें। भावनाओं को दबाने की कोशिश आमतौर पर काम नहीं करती है और यह व्यक्ति पर उल्टा हो सकता है।
भावनाओं को करें महसूस
स्वयं को अपनी भावनाओं को महसूस करने दें। उन्हें कैद करने की जरूरत नहीं है। जरूरत पड़ने पर खुद को रोने दें या अन्य भावनाओं को व्यक्त करने दें। फिर अपनी मानसिकता को संतुलित करने पर काम करें।
गहरी लंबी सांस लें
गहरी सांस लेने का अभ्यास करें। ऐसा करने से आपको एक ही विषय पर अलग-अलग सोच प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। यह भ्रम पैदा करने वाली भावनाओं को कम करने में मदद करता है।
नकारात्मक विचारों से रहें दूर
नकारात्मक और चिंताजनक विचारों से दूर रहें। उन विचारों पर बिल्कुल ध्यान दें जो आपका तनाव बढ़ाते हैं। ऐसा करने से दिमाग में आने वाले ये विचार खुद-ब-खुद कम होते नजर आ सकते हैं।
हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाएं
अपना ख्याल रखें, व्यायाम करें, स्वस्थ भोजन करें, ऐसे शौक और गतिविधियों का हिस्सा बनें जो आपको सार्थक या आनंददायक लगें। अपनी अच्छी देखभाल करने से आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी।
दूसरों से लें मदद
दूसरों के साथ जुड़ें। उन लोगों से बात करें जो आपका साथ देते हैं और आपको आराम देते हैं। करीबी परिवार और दोस्तों को कठिन भावनाओं से निपटने में आपकी मदद करने दें। सामाजिक समर्थन आपको बेहतर महसूस करने में मदद कर सकता है।
धैर्य बनाए रखें
धैर्य रखें और खुद को समय दें। मजबूत भावनाएं अक्सर अस्थायी यानी कुछ पल के लिए होती हैं। धैर्य रखें और अपने आप को अपनी भावनाओं को समझने के लिए आवश्यक समय दें। सोचें कि ये पल भी गुजर जाएगा।
प्रोफेशनल हेल्प भी ले सकते हैं
जरूरत पड़ने पर आप किसी एक्सपर्ट की मदद ले सकते हैं। अगर आपको अपनी परिस्थिति से लड़ने में परेशानी हो रही है, तो किसी एक्सपर्ट से बात करें। इससे आप जल्दी समस्या का हल निकाल पाएंगे। याद रखें कि यह भावना केवल अस्थायी हैं। यहां तक कि सबसे तेजी से मन में आने वाली भावनाएं भी अस्थायी होती हैं। जब आप इनसे लड़ना सीख जाएंगे तो सकारात्मक और अधिक संतुलित भावनाएं वापस आएंगी।
भावनाएं नियंत्रण में रखकर आगे बढ़ें
रिलेशनशिप काउंसलर नीता सक्सेना कहती हैं कि अपनी भावनाओं के नियंत्रण में रखते हुए जीवन में आगे बढ़ते जाना और हर बाधा को मजबूती के साथ पार करना ही इमोशनल मैनेजमेंट है। जब आप स्थितियों के आगे टूटते नहीं बल्कि आत्मबल से उन्हें बदल देते हैं। यह आत्मबल आपको मानसिक मजबूती से मिलता है। अगर कुछ अच्छा हुआ है तो खुशी जरूर मनाएं। लेकिन अगर कुछ बुरा हुआ है तो जितना जल्दी हो सके उसे भुला दें। इस बुरी घटना को भुलाने का सबसे आसान तरीका है कि आप अपने काम पर फोकस करें। किसी बुरी घटना के कारण पूरा जीवन छोड़िए, पूरा दिन भी बर्बाद नहीं किया जा सकता। जिंदगी का नाम आगे बढ़ते जाना है। इस पल से सीख लेकर आगे बढ़ें।
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