नई दिल्ली: आज का युवा पढ़ा-लिखा है, जागरूक है और दुनिया से पहले से कहीं ज़्यादा जुड़ा हुआ है. उसके पास जानकारी है, अवसर हैं और बड़े सपने भी हैं.बावजूद इसके एक कड़वी सच्चाई यह है कि आज का युवा मानसिक बेचैनी, चिंता और ओवरथिंकिंग की समस्या से जूझ रहा है. सवाल उठता है कि आखिर जब सब कुछ मौजूद है, तो सुकून क्यों नहीं? इसी सवाल का जवाब एक्सपर्ट डॉ. चंदनी तुगनैत ने दिया है.
लोकल 18 से बातचीत में उन्होंने इसके पीछे के कई अहम कारणों को विस्तार से समझाया
उम्मीदों की कई परतें बना रहीं दबाव
डॉ. चंदनी के अनुसार, आज के युवा पर सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई स्तरों का दबाव है. परिवार की उम्मीदें, खुद से की गई अपेक्षाएं, करियर, पैसे, रिश्ते और समाज की सोच सब मिलकर मानसिक बोझ बढ़ा रहे हैं. इसके साथ ही हर क्षेत्र में परफेक्ट बनने की चाह और जल्दी सफल होने की होड़ युवा को अपने जज़्बात समझने का मौका ही नहीं देती.
हसल और स्ट्रेस को बना लिया गया है नॉर्मल
आज की जीवनशैली में लगातार मेहनत और तनाव को सामान्य मान लिया गया है. बिना रुके काम करते रहना ही सफलता की पहचान बन गई है. लेकिन इस भागदौड़ का सीधा असर मानसिक और भावनात्मक सेहत पर पड़ रहा है, जिसे युवा अक्सर नजर अंदाज कर देता है.
सोशल मीडिया से बढ़ती तुलना
डॉ. चंदनी बताती हैं कि सोशल मीडिया पर लोग अपनी ज़िंदगी के सिर्फ अच्छे और खुशहाल पल दिखाते हैं. इन्हें देखकर युवा अपनी तुलना दूसरों से करने लगता है. जब कोई और आगे बढ़ता दिखता है, तो खुद को पीछे मानने की भावना जन्म लेती है, जो धीरे-धीरे आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है.
डूम स्क्रॉलिंग बन रही मानसिक थकान की वजह
घंटों तक बिना उद्देश्य के फोन चलाना, लगातार कंटेंट देखते रहना और बाद में खुद को दोषी महसूस करना ‘डूम स्क्रॉलिंग’ कहलाता है. यह आदत दिमाग को आराम नहीं देती, बल्कि मानसिक थकान और बेचैनी को और बढ़ा देती है.
सोच का असर शरीर पर भी पड़ता है
ओवरथिंकिंग सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रहती.इसका असर शरीर पर भी दिखता है, जैसे जबड़े का कसना, सीने में भारीपन, दिल की धड़कन तेज़ होना, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता की कमी. डॉ. चंदनी तुगनैत सुझाव देती हैं कि रोज़ कुछ समय सांसों पर ध्यान देना, सुबह फोन से दूरी बनाना, डिजिटल डिटॉक्स करना और लिखने की आदत डालना बेहद फायदेमंद हो सकता है.
मदद मांगना है ताकत की निशानी
अगर चिंता और ओवरथिंकिंग लगातार बढ़ रही हो, तो किसी प्रोफेशनल से बात करना ज़रूरी है. डॉ. चंदनी के अनुसार, मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि खुद के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकेत है.
खुद का ख्याल सबसे पहले
आज के युवा को यह समझना होगा कि मानसिक सेहत भी उतनी ही अहम है, जितनी सफलता. सही समय पर ध्यान और देखभाल से चिंता और ओवरथिंकिंग दोनों पर काबू पाया जा सकता है.