बचपन में सुनी गई कड़वी बातें ताउम्र याद क्यों रह जाती हैं?
इसके पीछे कुछ कारण छिपे हैं, जिनके बारे में आपको पता होना जरूरी है-1. ऐसी चोट को खतरा मानता है दिमाग
दिमाग की बनावट ऐसी है कि वह सकारात्मक अनुभवों की तुलना में नकारात्मक घटनाओं को ज्यादा तेजी से और गहराई से पकड़ता है। इसे न्यूरोसाइंस में नेगेटिविटी बायस कहा जाता है।- एमिग्डला का रोल अहम: मस्तिष्क का एमिग्डला हिस्सा हमारी भावना और खतरे के अलार्म की तरह काम करता है। जब कोई व्यक्ति बच्चे को अपमानित करता है, तो एमिग्डला इसे एक बड़ा खतरा समझकर जमा कर लेता है।
- हिप्पोकैम्पस में याद: इसके बाद मस्तिष्क का हिप्पोकैम्पस उस कड़वे अनुभव को हमेशा के लिए यादों की तिजोरी में सुरक्षित कर देता है।
- न्यूरल फुटप्रिंट: बचपन में मस्तिष्क विकास का होता है। ऐसे में मिला एक भी आघात दिमाग पर एक लकीर छोड़ जाता है। इस एक कड़वी बात के असर को मिटाने के लिए कई पॉजिटिव एक्सपीरियंस की जरूरत पड़ती है।
-
2. गुरु और माता-पिता का अधिकार
बच्चे अपने शिक्षकों और माता-पिता को आदर्श मानते हैं। वे अपनी पहचान और सही-गलत का पैमाना उन्हीं की नजरों से तय करते हैं। जब कोई शिक्षक या कोच किसी बच्चे से कहता है कि तुम नाकाम हो, तो बच्चा यह नहीं सोच पाता कि सामने वाला इंसान किसी तनाव में हो सकता है। वह उस बात को अपने जीवन का अंतिम सत्य मान लेता है। बच्चों को जिस व्यक्ति से मार्गदर्शन और सुरक्षा की उम्मीद होती है, जब वही आलोचना करता है, तो उसका भरोसा पूरी तरह टूट जाता है।3. कच्ची उम्र में आत्म-सम्मान को पहुंचती है ठेस
बचपन और किशोरावस्था का समय अपनी पहचान बनाने का होता है। इस दौरान बच्चे लोगों से मिलने वाले संदेशों से तय करते हैं कि वे कैसे हैं और क्या कर सकते हैं।- इस उम्र में बोली गई कड़वी बातें गीले सीमेंट पर पड़े निशान की तरह होती हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह निशान सूखकर पक्का हो जाता है और व्यक्ति के आत्मविश्वास को कमजोर कर देता है।
- जब एक मार्गदर्शक कड़वा रुख अपनाता है, तो बच्चा एक प्रकार के भावनात्मक धोखे का अनुभव करता है। उम्मीद और सच्चाई के बीच का यह अंतर याद को और तीखा बना देता है।
बच्चे को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
कड़वी बातें सिर्फ मन को ठेस नहीं पहुंचातीं, बल्कि इनका असर गहरा और गंभीर हो सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक, बचपन में लगातार मिली डांट-फटकार से कई मानसिक समस्याएं जन्म लेती हैं-- तनाव और डिप्रेशन का शिकार होना
- अपनी भावनाओं पर नियंत्रण न रख पाना
- रिश्तों में भरोसा करने में परेशानी होना
- खुद को कमतर आंकना और पढ़ाई या करियर में पिछड़ जाना
- खुद को नुकसान पहुंचाने के नकारात्मक विचार आना
निष्कर्ष बच्चे घटनाओं से ज्यादा उन भावनाओं को याद रखते हैं जो उन्होंने उस दौरान महसूस की थीं। टूटा हुआ खिलौना या मेज पर गिरा हुआ दूध इंसान भूल जाता है, लेकिन उस वक्त किसी बड़े का कठोर रवैया ताउम्र याद रहता है।
The articles, news features, interviews, quotes, and media content displayed on this page are the property of their respective publishers and media houses. All such materials have been sourced from publicly available online platforms where our name, views, or contributions have been referenced, quoted, or featured.
Gateway of Healing / Dr. Chandni Tugnait / Others (as applicable) does not claim ownership over any external media content reproduced or linked here. The purpose of displaying these articles is solely for informational use, record-keeping, and to acknowledge media mentions related to our work.
Full credit for authorship, editorial content, and intellectual property rights belongs to the original publishers, journalists, and media organizations.
If any publisher or rights holder wishes to request modification, updated attribution, or removal of any content featured on this website, they may contact us at info@gatewayofhealing.com, and we will take appropriate action promptly.
Read the Article on Author's webpage - CLICK HERE
