अक्सर माता-पिता तब परेशान हो जाते हैं, जब उनका बच्चा, जो कभी हर बात उनसे शेयर करता था, अब कमरे का दरवाजा बंद रखने लगा है या हर समय दोस्तों के साथ रहने की जिद करता है। 9 से 13 साल की उम्र के बीच बच्चों में यह बदलाव आना काफी आम है। इसे ‘प्री-एडोलेसेंस’ कहा जाता है। ऐसे में अगर आपका बच्चा भी इस तरीके की हरकत कर रहा है तो सबसे पहले इसके पीछे के कारण के बारे में पता होना  जरूरी है। आज का हमारा लेख इसीविषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि कैसे बच्चों को अपने करीब किया जाए और क्यों बच्चे कटने लगते हैं। इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है।पढ़ते हैं आगे…

अपनी पहचान की तलाश

इस उम्र में बच्चे खुद को एक फ्री व्यक्ति के रूप में देखते हैं। ऐसे में वे अब केवल “किसी के बेटे या बेटी” बनकर नहीं रहना चाहते। उन्हें लगता है कि दोस्तों के बीच वे अपनी पसंद-नापसंद ज्यादा बेहतर तरीके से बता सकते हैं, जहां उन्हें जज भी नहीं किया जाएगा। दोस्तों के साथ रहना उन्हें एक अलग होने का अहसास दिलाता है।

फ्रीडम की भूख

माता-पिता अक्सर सुरक्षा के लिहाज से बच्चों को टोकते रहते हैं, वहां मत जाओ, यह मत खाओ आदि। बच्चों को यह रोक-टोक पसंद नहीं। इसके अलग, दोस्तों के साथ उन्हें बराबरी का अहसास होता है और उन्हें लगता है कि वहां वे अपनी मर्जी के मालिक हैं।

इमोशनल जुड़ाव

जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उनके दिमाग में हार्मोनल बदलाव होते हैं। उन्हें लगता है कि उनके माता-पिता उनके नए इमोशंस को नहीं समझ पाएंगे। उन्हें लगता है कि जो बातें उनके दोस्त समझ सकते हैं, वे घर पर शेयर करने से केवल लेक्चर ही मिलेगा।

एक्सपर्ट की राय

डॉ. चांदनी के मुताबिक, इस स्थिति में बच्चों पर दबाव बनाना उन्हें आपसे और दूर कर सकता है। जी हां, बच्चों का दोस्तों की ओर झुकाव उनके विकास के लक्षण हैं। इसे गलत न लें। आप उनके दोस्तों की बुराई न करके उन्हें रोकें और आप उनके दोस्तों को घर पर बुलाएं।

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