आखिर इस उम्र में इतने झगड़े क्यों होते हैं?
1- दिमाग नहीं होता विकसित: सबसे पहले पेरेंट्स को यह समझना जरूरी है कि टीनएजर्स का दिमाग इस वक्त में लगातार विकसित हो रहा होता है। ब्रेन का वह हिस्सा, जो सही-गलत समझने, गुस्सा कंट्रोल करने और दूसरों की बात समझने में मदद करता है, लगभग 25 साल तक पूरी तरह विकसित होता है। इसी वजह से कई बार बच्चा चीजों को अलग तरीके से समझ लेता है। मां की चिंता उसे आलोचना लग सकती है, साधारण सवाल पूछताछ जैसा महसूस हो सकता है, और प्यार से बनाए गए नियम उसे रोक-टोक जैसे लग सकते हैं। 2-बच्चे बनना चाहते हैं अपनी पहचान: इस उम्र मेंबच्चे अपनी अलग पहचानबनाना चाहते हैं। एक लड़की भी अपने परिवार, खासकर मां से अलग खुद को समझने और पहचान बनाने की कोशिश करती है। ऐसे में जब मां उसे समझाती या सुधारती है, तो उसे लगता है कि उसकी आजादी छीनी जा रही है या उसे कंट्रोल किया जा रहा है। 3-इमोशन्स संभालने की नहीं होती क्षमता: इस उम्र में लड़कियां भावनात्मक रूप से बहुत संवेदनशील होती हैं। यह जिद या नाटक नहीं होता, बल्कि इसलिए होता है क्योंकि उनके इमोशन्स को संभालने की क्षमता अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती। इसलिए जो बात मां को सामान्य लगती है, वही बात बेटी को बहुत ज्यादा बुरी लग सकती है।प्यार की कमी नहीं होती है यह
मां और बेटी दोनों को यह समझना जरूरी है कि यह प्यार की कमी नहीं है। यह एक स्वाभाविक बदलाव है, जहां बच्चा बड़ा हो रहा होता है और अपनी अलग पहचान बनाना चाहता है। असल में, यह स्थिति जीव विज्ञान, मनोविज्ञान और विकास तीनों के टकराव का नतीजा होती है। इसीलिए इस स्थिति को मां और बेटी दोनों को ही बेहद सावधानी से स्थिति को संभालना चाहिए।मदर्स इस स्थिति को कैसे संभालें:
1. पहले सुनें, फिर सलाह दें: टीनएजर्स को कोई भी बात समझाने ये गाइड करने से पहले उन्हें यह महसूस करना जरूरी है कि उनकी बात सुनी जा रही है। इसलिए कुछ भी कहने से पहले उन्हें ध्यान से सुनें।बेटियों को समझनी चाहिए ये 5 बातें:
1. लहजे को नजरअंदाज करें: बेटियों को यह समझने की जरूरत है कि कभी-कभी मां का बोलने का तरीका सख्त लग सकता है, लेकिन उनकी चिंता आमतौर पर सच्ची होती है। 2. शांति से स्पेस मांगें: इस वक्त में झगड़ा करने के बजाय आप मां से साफ और शांति से कहें कि आपको थोड़ा खुद के लिए वक्त चाहिए। 3. खुद से शेयर करें: अपनी छोटी-छोटी बातें खुद बताने से मां की चिंता और सवाल कम हो जाते हैं। इसीलिए कोशिश करें कि उनसे शेयर करें। 4. धैर्य रखें: आपकी मां भी इस नए दौर को समझ रही हैं। उनके पास भी हर बात का जवाब नहीं होता, इसलिए उन्हें भी समय दें। 5. झगड़े के बाद सुलह करें: अगर बहस हो जाए, तो बाद में ‘सॉरी’ कहना या मान लेना कि बात बिगड़ गई थी, बहुत जरूरी है। इससे दोनों के बीच भरोसा कायम होता है। बातचीत जारी रहना है बेहद जरूरी किशोरावस्था में मां-बेटी का रिश्ता मुश्किलों से टूटता नहीं है, बल्कि यह उसी तरह आगे बढ़ रहा होता है जैसा उसे होना चाहिए। इस समय होने वाले छोटे-छोटे मनमुटाव इस वक्त का अहम हिस्सा होते हैं। ध्यान रखें कि जो परिवार मजबूत बनकर निकलते हैं, वे वो नहीं होते जो झगड़ों से बचते हैं, बल्कि वे होते हैं जो हर हाल में बातचीत जारी रखते हैं।हमने इस लेख की समीक्षा कैसे की
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- Apr 28, 2026, 12:47 PM
- Medically Reviewed by Dr. Chandni Tugnait
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