भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं यूजर्स
भारत में रिश्तों को जीने और निभाने का तरीका खामोशी से बदल रहा है. साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एडल्ट्री को अपराध की श्रेणी से हटा दिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि व्यक्ति की पसंद, गरिमा और यौन स्वायत्तता उसके मौलिक अधिकार हैं. आपसी सहमति से बने निजी संबंधों में सरकार या कोर्ट का दखल नहीं होना चाहिए. ‘ग्लीडेन’ ऐप के भारत में 40 लाख से ज्यादा यूजर हैं. यह ऐप महिलाओं के लिए फ्री है. पिछले दो सालों में महिलाओं के साइन-अप में 148 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. ऐप के द्वारा प्रकाशित डाटा के अनुसार कई लोग अपनी शादी में स्थिरता बनाए रखते हुए, बाहर भावनात्मक जुड़ाव या कुछ नया तलाश रहे हैं. पुरुष आमतौर पर 25 से 30 साल की कम उम्र की पार्टनर ढूंढते हैं. जबकि महिलाएं 30 से 40 साल की उम्र के पुरुषों को प्राथमिकता देती हैं. शहरों की बात करें तो बेंगलुरु में इसके सबसे अधिक 18 प्रतिशत यूजर हैं. हैदराबाद में 17 प्रतिशत, दिल्ली में 11 प्रतिशत, मुंबई में 9 प्रतिशत और पुणे में 7 प्रतिशत यूजर एक्टिव हैं. अनामिका कहती हैं, “मुझे अपनी शादी को सुधारने में समय और ऊर्जा लगानी चाहिए. लेकिन मैं यह समझ चुकी हूं कि मेरे और मेरे पति के बीच की बुनियादी समस्याएं कभी खत्म नहीं होंगी. हम हमेशा लड़ते रहते थे. मैं ऐप के जरिए दो लड़कों से रेस्तरां में मिली. मुझे खाना बनाना पसंद है, तो मैं उनके लिए घर से लंच बनाकर ले जाती थी और वे उसकी तारीफ भी करते थे.” क्या उन्हें इसका पछतावा है? अनामिका जवाब में कहती हैं, “नहीं. ऐप पर कोई किसी को जज नहीं करता. अन्य लोगों से मिलकर और बात करने से मैं पहले से ज्यादा खुश रहने लगी हूं. पति के साथ मेरी बहस भी कम होने लगी है. यह बदलाव देखकर वह भी खुश नजर आते हैं.” यह दिखाता है कि आर्थिक आजादी ने महिलाओं को यह सोचने की ताकत दी कि उनकी इच्छाएं और जरूरतें भी मायने रखती हैं. साइकोथेरेपिस्ट और रिलेशनशिप एक्सपर्ट डॉ. चांदनी टुगनैत ने डीडब्ल्यू से बात की. उनके मुताबिक, पहले शादी टूटने का डर इसलिए ज्यादा था क्योंकि महिलाओं को अकेले जीना मुश्किल लगता था. अब यह डर धीरे-धीरे कम हो रहा है.छोटे शहरों में एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर
कुछ साल पहले तक अगर कोई शादी के बाहर किसी से मिलना चाहता, तो यह इतना आसान नहीं था. डॉ. चांदनी बताती हैं कि ऐसे रिश्तों की शुरुआत अक्सर अचानक हुई मुलाकातों से होती थी. यह धीरे-धीरे आगे बढ़ता. यहां काफी रिस्क और मेहनत दोनों शामिल होते थे. लेकिन ग्लीडन जैसे ऐप्स ने इस प्रक्रिया को नया रूप दिया है. उनके मुताबिक, “इन ऐप्स ने लोगों के व्यवहार के साथ अटैचमेंट और लॉयल्टी को देखने का नजरिया बदल दिया है. पहले चीटिंग में एक गिल्ट होता था. अब यह एक स्क्रॉल की तरह नॉर्मल फील होने लगा है.” ग्लीडन के खुद के डाटा में टियर-2 और टियर-3 में यूजरों की संख्या अधिक बताई है. लखनऊ और पटना जैसे शहरों में पुरुष और महिलाओं के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ी है. डॉ.चांदनी ने इसके पीछे कई कारण बताए. पहले यह सिर्फ मेट्रो शहर तक सीमित था. अब छोटे शहरों में भी सस्ता इंटरनेट डाटा प्लान और अफोर्डेबल स्मार्टफोन हर किसी की पहुंच में हैं. साथ ही ओटीटी और सोशल मीडिया ने इन शहरों के लोगों को एक अलग तरह की लाइफस्टाइल दिखाई है. डॉ.चांदनी ने बताया, “छोटे शहरों में नई पीढ़ी वेब सीरीज देख रही है, घूम रही है और कमा रही है. फिर भी शादी के फैसले अब भी घरवाले ही लेते हैं. इस पीढ़ी की इच्छाएं और सपने बदल चुके हैं. मगर उनके आसपास का सामाजिक ढांचा वैसा ही है.”तलाक से आसान है बाहर रिश्ता रखना
लोग अक्सर शादी तोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाते. तलाक या अलग होना आज भी समाज में एक बड़ा टैबू माना जाता है. ऐसे में पार्टनर शादी के रिश्ते से बाहर किसी को ढूंढते हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म उन्हें ऐसा सुरक्षित स्पेस देते हैं, जहां वे अपनी पहचान छिपाकर बातचीत कर सकते हैं. यही फीचर उन्हें इन प्लेटफॉर्म्स की ओर खींचता है. देश में तलाक के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है और अब यह सिर्फ शहरी इलाकों तक सीमित नहीं रहा है. मनीकंट्रोल के सर्वे में बताया गया कि साल 2017-18 से 2023-24 के बीच शहरी पुरुषों में तलाक की दर 0.3 प्रतिशत से बढ़कर 0.5 प्रतिशत हो गई है. जबकि शहरी महिलाओं में यह दर 0.6 प्रतिशत से बढ़कर 0.7 प्रतिशत तक पहुंची है. वहीं, ग्रामीण इलाकों में भी खासकर महिलाओं के बीच तलाक और अलग रहने के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई. लेकिन यह कहना गलत होगा कि इसकी अकेली वजह ये प्लेटफॉर्म्स हैं. डॉ. चांदनी बताती हैं, “कुछ मामलों में पार्टनर बाहर रिश्ता पाकर घर में ज्यादा शांत और टॉलरेंट हो जाते हैं. यह एक तरह का कॉम्प्रोमाइज है. यह हेल्दी नहीं है. लेकिन शादी बची रहती है.”ऐप्स से जुड़े कानूनी प्रावधान
सुप्रीम कोर्ट में वकील स्नेहा सिंह महिला एवं बच्चों के मामलों की विशेषज्ञ हैं. वह समझाती हैं कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को जिंदगी अपनी पसंद से जीने का अधिकार है. इसमें भावनात्मक और निजी रिश्तों के फैसले भी शामिल हैं. दो बालिग लोग आपसी सहमति से कोई रिश्ता बनाते हैं, तो वह कानूनन गलत नहीं माना जाता. एडल्ट्री अपराध नहीं है. यानी अब यह आपराधिक मामला नहीं, बल्कि एक सिविल मुद्दा है, जिसे तलाक के आधार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. स्नेहा आगे बताती हैं, “इसी वजह से ऐसे ऐप्स का इस्तेमाल भारत में अवैध नहीं है. अगर पत्नी अपने पति को या पति अपनी पत्नी को ऐसे ऐप्स इस्तेमाल करते हुए पकड़ता है, तो इसे सिविल मामले में ‘चीटिंग’ माना जाएगा. मगर भारत में अभी भी कई महिलाओं के लिए तलाक लेना आसान नहीं होता. उन पर सामाजिक दबाव होता है. फिर तलाक की प्रक्रिया लंबी और थकाने वाली है.” ऐसे ऐप्स का इस्तेमाल करने वाली महिलाएं भी अगर किसी तरह की परेशानी का सामना करती हैं, तो वे कानून का सहारा ले सकती हैं. स्नेहा ने उदाहरण दिया, “अगर कोई व्यक्ति अश्लील सामग्री भेजता है या अभद्र व्यवहार करता है, तो आईटी एक्ट के तहत शिकायत की जा सकती है.” अगर इन ऐप्स पर किसी को धमकी दी जाती है या परेशान किया जाता है, तो कानून में इसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है. फोटो का गलत इस्तेमाल और फर्जी प्रोफाइल बनाने पर भी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी में केस दर्ज हो सकता है.The articles, news features, interviews, quotes, and media content displayed on this page are the property of their respective publishers and media houses. All such materials have been sourced from publicly available online platforms where our name, views, or contributions have been referenced, quoted, or featured.
Gateway of Healing / Dr. Chandni Tugnait / Others (as applicable) does not claim ownership over any external media content reproduced or linked here. The purpose of displaying these articles is solely for informational use, record-keeping, and to acknowledge media mentions related to our work.
Full credit for authorship, editorial content, and intellectual property rights belongs to the original publishers, journalists, and media organizations.
If any publisher or rights holder wishes to request modification, updated attribution, or removal of any content featured on this website, they may contact us at info@gatewayofhealing.com, and we will take appropriate action promptly.
Read the Article on Author's webpage - CLICK HERE
